“वृंदावन पूजा – लोक आस्था और प्रकृति का संगम” यह पारंपरिक लोकचित्र एक स्त्री को वृंदावन (तुलसी/पवित्र वृक्ष) के समक्ष कमल पुष्प अर्पित करते हुए दर्शाता है।
यह पारंपरिक लोकचित्र एक स्त्री को वृंदावन (तुलसी/पवित्र वृक्ष) के समक्ष कमल पुष्प अर्पित करते हुए दर्शाता है। चित्र में लाल-नारंगी साड़ी, आभूषणों से सजी स्त्री और सामने दीपक से आलोकित पूजा स्थल भारतीय गृहस्थ जीवन की श्रद्धा और संस्कृति को उजागर करता है। वृक्ष पर बैठे पक्षी, सजावटी बॉर्डर और सरल रेखाएँ इस लोककला को जीवंत और भावपूर्ण बनाती हैं। यह चित्र भक्ति, प्रकृति और नारी शक्ति का सुंदर प्रतीक है।
पारंपरिक भारतीय लोककला शैली में निर्मित चित्र
पूजा करती स्त्री और पवित्र वृक्ष (वृंदावन) का चित्रण
कमल पुष्प और दीपक का सांकेतिक प्रयोग
हाथ से बनाई गई सजावटी बॉर्डर
चमकीले लाल, हरे, पीले और नारंगी रंग
सरल रेखांकन और स्पष्ट आकृतियाँ
स्त्री आकृति – श्रद्धा, समर्पण और नारी शक्ति का प्रतीक
वृंदावन/वृक्ष – पवित्रता, जीवन और प्रकृति का सम्मान
कमल पुष्प – शुद्धता और भक्ति का संकेत
दीपक – ज्ञान, आशा और सकारात्मक ऊर्जा
लोककला शैली – सांस्कृतिक विरासत और परंपरा का संरक्षण
घर, पूजा कक्ष या सांस्कृतिक स्थान के लिए उपयुक्त
भारतीय लोक परंपरा और ग्रामीण जीवन की झलक
हाथ से बनी कलाकृति, हर पीस अद्वितीय
सजावटी फ्रेम के साथ दीवार कला के रूप में आदर्श
शुभ और अर्थपूर्ण उपहार विकल्प