“तपस्वी ऋषि – आत्मज्ञान का प्रतीक” यह कलाकृति एक प्राकृतिक गोलाकार पत्थर पर बने तपस्वी ऋषि के मुख को दर्शाती है,
यह कलाकृति एक प्राकृतिक गोलाकार पत्थर पर बने तपस्वी ऋषि के मुख को दर्शाती है, जिसे लकड़ी के फ्रेम में सादगीपूर्ण जूट (बर्लैप) बैकग्राउंड के साथ सजाया गया है। ऋषि की शांत मुद्रा, लंबी दाढ़ी, और बंद आंखें गहन ध्यान और आत्मिक शांति का भाव प्रकट करती हैं। पृष्ठभूमि में अग्नि और जल के प्रतीक तत्व जीवन के संतुलन और तपस्या की शक्ति को दर्शाते हैं। यह कला भारतीय आध्यात्मिक परंपरा की गहराई को उजागर करती है।
प्राकृतिक पत्थर पर बनी हस्तनिर्मित कलाकृति
तपस्वी ऋषि का ध्यानमग्न चेहरा
लकड़ी का सादा और मजबूत फ्रेम
जूट/कपड़े की प्राकृतिक बनावट वाली पृष्ठभूमि
मिट्टी, भूरा, नीला और सुनहरे रंगों का सौम्य प्रयोग
पारंपरिक व आध्यात्मिक कला शैली
ऋषि की आकृति – ज्ञान, वैराग्य और आत्मबोध का प्रतीक
प्राकृतिक पत्थर – स्थायित्व और प्रकृति से जुड़ाव
अग्नि व जल के संकेत – ऊर्जा और शांति का संतुलन
हस्तनिर्मित स्वरूप – हर कलाकृति को विशिष्ट बनाता है
सादा फ्रेमिंग – ध्यान को मुख्य कला पर केंद्रित रखती है